नई दिल्ली: फ्रांस सरकार ने पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी के बयान पर चिंता जताई है. फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद से बयान पर सफाई मांगते हुए इन टिप्पणियों को सुधारने और सम्मान के आधार पर बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने को कहा है. 

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, ये शब्द घृणा से परिपूर्ण, नफरत फैलाने वाले और सरासर झूठे हैं, हिंसा की विचारधारा से जुड़े हैं. विदेश मंत्रालय से जारी बयान में आगे कहा गया कि, ‘हम सिरे से इसका विरोध करते हैं और ऐसी बातें इस स्तर पर किसी भी तौर पर स्वीकार्य नहीं है.’

फ्रांस ने इसलिए जताई चिंता
दरअसल पाकिस्तानी मंत्री ने एक ट्वीट के जरिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों पर आरोप लगाया था कि फ्रांस में मुसलमानों के साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है जैसा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने यहूदियों के साथ किया था. फ्रांस सरकार से उस ट्वीट को वापस लेने की मांग की थी.

पाकिस्तानी कैबिनेट मंत्री शीरीन मजारी ‘लेडी तालिबान’ भी कह कर बुलाया जाता है. मजारी ने शनिवार को एक स्टोरी का लिंक शेयर करते हुए लिखा था कि ‘मैक्रों वैसा ही मुसलमानों के साथ व्यवहार कर रहे हैं जैसा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों ने यहूदियों के साथ किया था.’

तकरार की मूल वजह
मानवाधिकार मंत्री मजारी द्वारा पोस्ट टिप्पणी फ्रांसीसी पत्रिका में पैगंबर मोहम्मद के अपमान से संबंधित कार्टून के प्रकाशन और उसके बाद फ्रांस में हुई वारदातों को लेकर किया जिसके बाद पाकिस्तान और फ्रांस आमने सामने हैं. और पाकिस्तान के कट्टरपंथी फ्रांस को लगातार कोस रहे हैं.

पैगंबर पर बनाया गया चित्र मुस्लिम समुदायों में गुस्सा भर गया और दुनिया भर में इसे लेकर प्रदर्शन हुए खासकर पाकिस्तान में इसका जमकर विरोध हुआ. पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक ने प्रदर्शन के नाम पर इस्लामाबाद में जमकर कोहराम मचाते हुए फ्रांसीसी दूत को देश से बाहर निकालने की मांग हुई थी. 

संसद में पास हुआ प्रस्ताव
पाकिस्तान की संसद में बाकायदा पाकिस्तानी दूत को फ्रांस से वापस बुलाने का प्रस्ताव भी पारित किया था, लेकिन बाद में पता चला कि वर्तमान में पेरिस में पाकिस्तान का कोई अधिकृत राजदूत नहीं है. हालांकि फ्रांस की सख्ती के बाद शीरीन मजारी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है. 

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