Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली20 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

2013 में EU के साथ FTA पर काफी मोलभाव हुआ था। लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद के बाद यह बातचीत बंद पड़ी है।

  • 11.1% हिस्सेदारी के साथ EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर
  • RCEP से बाहर होने के बाद दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट जरूरी

भारत ने 2012 के बाद से कोई भी ट्रेड एग्रीमेंट नहीं किया है। ऐसे में भारत यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका से फिर संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत शुरू कर सकता है। रीजनल कॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) से बाहर रहने के बाद मोदी सरकार अन्य आर्थिक ब्लॉक्स से ट्रेड डील करने के लिए उत्सुक है। एक उच्च स्तरीय सूत्र के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे चीन विरोधी सेंटिमेंट का भारत को लाभ मिलने की उम्मीद है।

यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर

यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। इसकी इंडियन ट्रेन में कुल 11.1% हिस्सेदारी है। इसके बाद अमेरिका और चीन का नंबर आता है। इन दोनों की इंडियन ट्रेड में 10.7% हिस्सेदारी है। आर्थिक मामलों पर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि हम इस बात को लेकर सकारात्मक हैं कि यूरोपियन यूनियन-अमेरिका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत को लाभ मिलेगा और बातचीत जल्द शुरू होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी दूसरे देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट का विरोध नहीं किया है। अब जब भारत RCEP से बाहर हो गया है तो यह काफी जरूरी है।

FTA पर EU के साथ 2013 में बंद हुई थी बातचीत

2013 में EU के साथ FTA पर काफी मोलभाव हुआ था। लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद के बाद यह बातचीत बंद पड़ी है। कई एशियाई देश पश्चिमी देशों से ट्रेड डील की ओर देख रहे हैं। वियतनाम पहले ही वियतनाम वन नाम से कई डील कर चुका है। यह कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़े कंपटीशन के तौर पर उभर रहा है। वियतनाम EU के साथ भी ट्रेड पैक्ट कर चुका है। यूरोपियन कमीशन के प्रेसीडेंट ने एक बयान में कहा है कि कोरोनावायरस संकट के बाद यूरोपियन इकोनॉमी मजबूती के लिए प्रत्येक अवसर का लाभ लेना चाहती है।

भारत को समय नष्ट नहीं करना चाहिए: सराफ

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के प्रेसीडेंट एसके सराफ का कहना है कि भारत को समय नष्ट नहीं करना चाहिए। किसी और देश के इस डील को पूरा करने से पहले भारत को कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को FTA पर बंद पड़ी बातचीत को फिर शुरू करना चाहिए और जियो-पॉलीटिकल स्थिति बदलने के कारण अन्य ट्रेड पैक्ट भी करने चाहिए। यूरोप में मौजूदा चीन विरोधी सेंटिमेंट भारत की मदद कर सकता है। ऐसे में हमें इस अवसर को खराब नहीं करना चाहिए।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »